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Pariyon Ke Beech
Coles
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Pariyon Ke Beech in Vernon, BC
Current price: $3.99

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परियों के बीच उपन्यास एक ऐसे कोमल अहसास और रिश्ते का संसार हमारे सामने उजागर करता है जिसका वजूद हमेशा से रहा है, लेकन ज़्यादातर वक़्तों में यह अनकहा और पोशीदा रहा; कई बार उसे अपनी स्वाभाविक मानवीयता की अनदेखी करनेवाले सवालों का सामना भी करना पड़ा है।
दो औरतों, मशहूर तवायफ़ चपला बाई और शायरा नफ़ीस बाई के आपसी प्यार की इस कहानी में उनके कुछ मर्द दोस्त भी हैं जो उनकी मदद करते हैं। इन दोस्तों में कुछ नामचीन शायर हैं तो ख़ुद एक मर्द से प्यार करने वाला शरद भी।
उपन्यास में रंगीन, इंशा और जुरअत जैसे उर्दू के कुछ असल शायर क़िरदार के रूप में आए हैं। उनकी शायरी के साथ-साथ उस दौर की कुछेक ग़ज़लों-नज़्मों और गानों का इस्तेमाल उपन्यास की ख़ूबसूरती और असर को बढ़ा देता है।
वस्तुत: यह उपन्यास पूर्व-औपनिवेशिक काल के उस दौर को जीवन्त करता है जब समलैंगिक प्यार को अपेक्षाकृत सहजता से स्वीकार किया जाता था। लेकिन 1857 के बाद के दौर में उसको सवालिया बना दिया गया।
परियों के बीच उपन्यास एक ऐसे कोमल अहसास और रिश्ते का संसार हमारे सामने उजागर करता है जिसका वजूद हमेशा से रहा है, लेकन ज़्यादातर वक़्तों में यह अनकहा और पोशीदा रहा; कई बार उसे अपनी स्वाभाविक मानवीयता की अनदेखी करनेवाले सवालों का सामना भी करना पड़ा है।
दो औरतों, मशहूर तवायफ़ चपला बाई और शायरा नफ़ीस बाई के आपसी प्यार की इस कहानी में उनके कुछ मर्द दोस्त भी हैं जो उनकी मदद करते हैं। इन दोस्तों में कुछ नामचीन शायर हैं तो ख़ुद एक मर्द से प्यार करने वाला शरद भी।
उपन्यास में रंगीन, इंशा और जुरअत जैसे उर्दू के कुछ असल शायर क़िरदार के रूप में आए हैं। उनकी शायरी के साथ-साथ उस दौर की कुछेक ग़ज़लों-नज़्मों और गानों का इस्तेमाल उपन्यास की ख़ूबसूरती और असर को बढ़ा देता है।
वस्तुत: यह उपन्यास पूर्व-औपनिवेशिक काल के उस दौर को जीवन्त करता है जब समलैंगिक प्यार को अपेक्षाकृत सहजता से स्वीकार किया जाता था। लेकिन 1857 के बाद के दौर में उसको सवालिया बना दिया गया।


















