
Choice Made Simple!
Too many options?Click below to purchase an online gift card that can be used at participating retailers in Village Green Shopping Centre and continue your shopping IN CENTRE!Purchase HereHome
Jenny Meharban Singh
Coles
Loading Inventory...
Jenny Meharban Singh in Vernon, BC
Current price: $2.99

Coles
Jenny Meharban Singh in Vernon, BC
Current price: $2.99
Loading Inventory...
Size: Kobo eBook
*Product information may vary - to confirm product availability, pricing, shipping and return information please contact Coles
भारतीय मूल के प्रवासी मेहरबान सिंह और उनकी पत्नी लिज़ा की इकलौती सन्तान सुनहरी बालों वाली जैनी पूर्व और पश्चिम, देश और विदेश के दोरंगी सम्मिश्रण की अनोखी तस्वीर है। चुलबुली मनमौजी, समझदार और गम्भीर एक साथ।
‘जैनी मेहरबान सिंह’ ज़िन्दगी के रोमांस, उत्साह, उमंग और उजास की पटकथा है जिसे कृष्णा सोबती ने गुनगुनी सादगी से प्रस्तुत किया है।
वैन्कूवर से दूर पिछवाड़े से झाँकते हैं एक-दूसरे के वैरी दो गाँव पट्टीवाल और अट्टारीवाल। एक-दूसरे को तरेरते दो कुनबों के बीच पड़ी गहरी दरारें, जान लेनेवाली दुश्मनियाँ और मरने-मारने की क़समें! ऐसे में मेहरबान सिंह और साहिब कौर की अल्हड़ मुहब्बत कैसे परवान चढ़ती! मेहरबान सिंह ने अपनी मुहब्बत की ख़ातिर जान बख़्श देने की दोस्ती निभाई और गाँव को पीठ दे कनाडा जा बसे। नए मुल्क में नई ज़िन्दगी चल निकली। लिज़ा को ख़ूब तो प्यार दिया, जैनी को भरपूर लाड़-चाव, फिर भी दिल से लगी साहिब कौर की छवि मद्धम न पड़ी—इसके बाद की चलचित्री कहानी क्या मोड़ लेती है— पढ़कर देखिए ‘जैनी मेहरबान सिंह’।
भारतीय मूल के प्रवासी मेहरबान सिंह और उनकी पत्नी लिज़ा की इकलौती सन्तान सुनहरी बालों वाली जैनी पूर्व और पश्चिम, देश और विदेश के दोरंगी सम्मिश्रण की अनोखी तस्वीर है। चुलबुली मनमौजी, समझदार और गम्भीर एक साथ।
‘जैनी मेहरबान सिंह’ ज़िन्दगी के रोमांस, उत्साह, उमंग और उजास की पटकथा है जिसे कृष्णा सोबती ने गुनगुनी सादगी से प्रस्तुत किया है।
वैन्कूवर से दूर पिछवाड़े से झाँकते हैं एक-दूसरे के वैरी दो गाँव पट्टीवाल और अट्टारीवाल। एक-दूसरे को तरेरते दो कुनबों के बीच पड़ी गहरी दरारें, जान लेनेवाली दुश्मनियाँ और मरने-मारने की क़समें! ऐसे में मेहरबान सिंह और साहिब कौर की अल्हड़ मुहब्बत कैसे परवान चढ़ती! मेहरबान सिंह ने अपनी मुहब्बत की ख़ातिर जान बख़्श देने की दोस्ती निभाई और गाँव को पीठ दे कनाडा जा बसे। नए मुल्क में नई ज़िन्दगी चल निकली। लिज़ा को ख़ूब तो प्यार दिया, जैनी को भरपूर लाड़-चाव, फिर भी दिल से लगी साहिब कौर की छवि मद्धम न पड़ी—इसके बाद की चलचित्री कहानी क्या मोड़ लेती है— पढ़कर देखिए ‘जैनी मेहरबान सिंह’।


















